सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में रोडसेफ्टी निर्देश जारी किए
सुप्रीम कोर्ट :- एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए, इन सड़कों पर भारी वाहन पार्किंग न हो
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए पूरे देश में कई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन निर्देशों एक्सप्रेसवे जैसी सड़कों पर भारी वाहनों की पार्किंग पर रोक भी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक सुस्ती या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के कारण एक्सप्रेसवे खतरे का गलियारा नहीं बनने चाहिए।
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की बेंच ने सड़क और परिवहन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों को सड़कों को सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए।
बेंच ने बताया कि नेशनल हाईवे भारत की सड़क लंबाई का सिर्फ 2% हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में इनका हिस्सा लगभग 30% है।
कृष्णराज चौधरी
भारत में सड़क सुरक्षा को अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत मौलिक मानते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग, ढाबों और सुरक्षा की कमी पर कड़े निर्देश जारी किए हैं। 2% सड़कों पर 30% मौतें होने का हवाला देते हुए, कोर्ट ने हाईवे पर भारी वाहनों की पार्किंग, अवैध अतिक्रमण को हटाने, और हर 75 किमी पर एंबुलेंस तैनात करने के आदेश दिए हैं। यह फैसला 2025 के अंत में राजस्थान के फलौदी और तेलंगाना में हुए बड़े सड़क हादसों के बाद लिया गया है।
ये निर्देश 13 अप्रैल को सामने आए। जहां कोर्ट 2 और 3 नवंबर 2025 को राजस्थान के फलोदी, तेलंगाना के रंगारेड्डी में लगातार हुई सड़क दुर्घटनाओं में 34 लोगों की मौत के बाद दर्ज केस पर सुनवाई कर रहा था।
इन दुर्घटनाओं का कारण सिस्टम की लापरवाही और बुनियादी ढांचे का फेल्योर था, जिसके कारण ये मौतें हुईं।
जस्टिस जेके माहेश्वरी
अवैध पार्किंग, ब्लैकस्पॉट जैसे टाले जा सकने वाले हादसों में एक भी जान का जाना, सुरक्षा व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश 9 पॉइंट्स में ...
- कोई भी भारी या कमर्शियल गाड़ी किसी भी नेशनल हाईवे के कैरिजवे या पक्के शोल्डर पर पार्क नहीं होगी, रुकेगी नहीं, सिवाय किसी तय जगह, ले-बाय, या सड़क किनारे की सुविधा वाली जगह के।
- निर्देश को लागू करने का काम एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के जरिए किया जाएगा। इसमें राज्य पुलिस को रियल-टाइम अलर्ट भेजना, GPS टाइमस्टैम्प वाले फोटो सबूत और इंटीग्रेटेड ई-चालान बनाना शामिल है।
- नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, राज्य पुलिस और राज्य परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को इन निर्देशों का पालन करना होगा। संबंधित जिलों के कलेक्टर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तय करेंगे। इनका पालन 60 दिन के अंदर किया जाना चाहिए।
- किसी भी नेशनल हाईवे के 'राइट ऑफ वे' (ROW) के अंदर किसी भी नए ढाबे, खाने की जगह या कमर्शियल इमारत का निर्माण और संचालन तुरंत प्रभाव से रोक दिया जाए।
- जिला मजिस्ट्रेट CNH एक्ट के प्रोसीजर और 7 अगस्त, 2025 के SOP के मुताबिक, सभी नई और पहले से मौजूद गैर-कानूनी इमारतों को 60 दिनों के अंदर गिराने / हटाने का काम करवाएंगे।
- कोई भी विभाग, अथॉरिटी, स्थानीय निकाय हाईवे सुरक्षा जोन के अंदर किसी भी जगह के लिए बिना NHAI/PWD की मंज़ूरी के कोई लाइसेंस, NOC या व्यापार की मंजूरी नहीं देगा। न ही लाइसेंस रिन्यू करेगा।
- ऐसी जगहों के लिए पहले से मौजूद सभी लाइसेंसों की 30 दिनों के अंदर समीक्षा की जाएगी।
- जिन जिलों से नेशनल हाईवे गुजरता है, वहां जिला मजिस्ट्रेट 15 दिन के अंदर एक सुरक्षा टास्क फोर्स बनाएंगे।
- पूरे भारत में हर जिले में इस आदेश के 7 दिन के अंदर फोर्स बनाई जाएगी। इसमें प्रशासन, पुलिस, NHAI, PWD के अधिकारी शामिल होंगे।

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