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Public Interest litigation जनहित याचिका क्या है?

संविधान का अनुच्छेद 39(A), जनहित याचिका (Public Interest Litigation) की नींव है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39 (A) यह सुनिश्चित करता है कि राज्य, व्यक्ति की जाति, धर्म, पंथ आदि की परवाह किए बिना कानून के शासन को बनाए रखेगा।



जनहित याचिका क्या है ?
जनहित याचिका वह याचिका है, जो कि लोगों (जनता. Public) के हितों के लिए कोर्ट में दायर की जाती है। कोई भी व्यक्ति जनता के हित में या फिर सार्वजनिक महत्व, जिसमें किसी वर्ग या समुदाय के हित या उनके मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हों, जनहित याचिका के जरिए न्यायालय की शरण ले सकता है।

जनहित याचिका का इतिहास
जनहित याचिका आने से पूर्व कानून की सामान्य प्रक्रिया में कोई व्यक्ति तभी अदालत जा सकता था जब उसका कोई व्यक्तिगत नुकसान हुआ हो। साल 1979 में इस अवधारणा में बदलाव आया। 1979 में अदालत ने एक ऐसे (हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य) मामले की सुनवाई करने का फैसला किया, जिसे पीड़ित ने नहीं बल्कि उनकी ओर से किसी दूसरों ने मामले को दाखिल किया था। 1979 में समाचार पत्रों में विचाराधीन कैदियों को लेकर एक खबर छपी थी जिसमें बताया गया था कि उन्हें सजा भी दी गई होती तो उतनी अवधि की नहीं होती जितनी उन्होंने विचाराधीन होते हुए काट ली है। इस खबर को ही आधार बनाकर एक वकील (कपिला हिंगोरानी) ने एक याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की। सर्वोच्च न्यायालय में यह मुकदमा चला और यह याचिका “जनहित याचिका” के रूप में प्रसिद्ध हुई ।

जनहित याचिका किस न्यायालय के समक्ष दायर की जा सकती है।
जनहित याचिका निम्नलिखित न्यायालयों के समक्ष दायर की जा सकती है :-
1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के समक्ष।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अन्तर्गत उच्च न्यायालय (High Court) के समक्ष

जनहित याचिका कब दायर की जा सकती है
जनहित याचिका दायर करने के लिए यह जरूरी है, कि लोगों के सामूहिक हितों जैसे सरकार के कोई फैसले या योजना, जिसका बुरा असर लोगों पर पड़ा हो। किसी एक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन होने पर भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है।

जनहित याचिका कौन व्यक्ति दायर कर सकता है
कोई भी व्यक्ति जो सामाजिक हितों के बारे में सोच रखता हो, वह जनहित याचिका दायर कर सकता है। इसके लिये यह जरूरी नहीं कि सका व्यक्तिगत हित भी सम्मिलित हो।

जनहित याचिका किसके विरूद्ध दायर की जा सकती है
जनहित याचिका केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, नगर पालिका परिषद और किसी भी सरकारी विभाग के विरूद्ध दायर की जा सकती है। यह याचिका किसी निजी पक्ष के विरूद्ध दायर नहीं की जा सकती। लेकिन अगर किसी निजी पक्ष, संस्था या कम्पनी के कारण जनहितों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा हो, तो उस पक्ष, संस्था या कम्पनी को सरकार के साथ प्रतिवादी के रूप में सम्मिलित किया जा सकता है। उदाहरण के लिये मध्य प्रदेश के किसी शहर में नगर पालिका द्वारा सार्वजनिक रोड पर दुकानों का निर्माण कर देना - जिससे वर्षों पुराना लोक मार्ग बंद हो जाये, तब जनहित याचिका में निम्नलिखित प्रतिवादी होंगे -
1. मध्य प्रदेश राज्य
2. नगर पालिका परिषद/नगर निगम
3. लोक निर्माण विभाग (PWD)

उच्च न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया क्या है
उच्च न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने के लिए निम्नलिखित बातों का होना जरूरी है।
प्रत्येक याचिका की एक छाया प्रति होती है। यह छाया प्रति अधिवक्ता की होती है। एक छाया प्रति, हर एक प्रतिवादी को देनी होती है और उस छाया प्रति की देय रसीद लेनी होती है। दूसरे चरण में जनहित याचिका की दो छाया प्रति, प्रतिवादी द्वारा प्राप्त की गई देय रसीद के साथ न्यायालय में देनी होती है।

उच्चतम न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया क्या है
उच्चतम न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने के लिये याचिका की पाँच छाया प्रति दाखिल करनी होती हैं। प्रतिवादी को याचिका की छाया प्रति सूचना आदेश के पारित होने के बाद ही दी जाती है।

क्या एक साधारण पत्र के जरिये भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है
जनहित याचिका एक खत या पत्र के द्वारा भी दायर की जा सकती है लेकिन यह याचिका तभी मान्य होगी जब यह निम्नलिखित व्यक्ति या संस्था द्वारा दायर की गई हो।
1. व्यथित व्यक्ति द्वारा,
2. सामाजिक हित की भावना रखने वाले व्यक्ति द्वारा,
3. उन लोगों के अधिकारों के लिये जो कि गरीबी या किसी और कारण से न्यायालय के समक्ष न्याय पाने के लिये नहीं आ सकते।

जनहित याचिका दायर होने के बाद न्याय का प्रारूप क्या होता है
जनहित याचिका में न्याय का प्रारूप प्रमुख रूप से दो प्रकार का होता है।
1. सुनवाई के दौरान दिये गये आदेश, इनमें प्रतिकर, औद्योगिक संस्था को बन्द करने के आदेश, कैदी को जमानत पर छोड़ने के आदेश, आदि होते हैं।
2. अंतिम आदेश जिसमें सुनवाई के दौरान दिये गए आदेशों एवं निर्देशों को लागु करने व समय सीमा जिसके अन्दर लागू करना होता है।

क्या जनहित याचिका को दायर करने व उसकी सुनवाई के लिये वकील आवश्यक है
जनहित याचिका के लिये वकील होना जरूरी है और राष्ट्रीय / राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अन्तर्गत सरकार द्वारा वकील की सेवाएं प्राप्त कराए जाने का भी प्रावधान है।
निम्नलिखित परिस्थितियों में भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है
  1. जब गरीबों के न्यूनतम मानव अधिकारों का हनन हो रहा हो।
  2. जब कोई सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों की पूर्ति न कर रहा हो।
  3. जब धार्मिक अथवा संविधान में दिये गये मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा हो ।
  4. जब कोई कारखाना या औद्योगिक संस्थान वातावरण को प्रदूषित कर रहा हो।
  5. जब सड़क में रोशनी (लाइट) की व्यवस्था न हो, जिससे आने जाने वाले व्यक्तियों को तकलीफ हो।
  6. जब कहीं रात में ऊंची आवाज में गाने बजाने के कारण ध्वनि प्रदूषण हो।
  7. जहां निर्माण करने वाली कम्पनी पेड़ों को काट रही हो, और वातावरण प्रदूषित कर रही हो।
  8. जब राज्य सरकार की अधिक कर लगाने की योजना से गरीब लोगों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़े।
  9. जेल अधिकारियों के खिलाफ जेल सुधार के लिये।
  10. बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूरी के खिलाफ।
  11. लैंगिक शोषण से महिलाओं के बचाव के लिये।
  12. उच्च स्तरीय राजनैतिक भ्रष्टाचार एवं अपराध रोकने के लिये।
  13. सड़क एवं नालियों के रखरखाव के लिये ।
  14. साम्प्रदायिक एकता बनाए रखने के लिये।
  15. व्यस्त सड़कों से विज्ञापन के बोर्ड हटाने के लिये, ताकि यातायात में कठिनाई न हो।

जनहित याचिका दायर करने की औसत लागत क्या है?
अन्य अदालती मामलों की तुलना में जनहित याचिका दाखिल करना सस्ता है। कोर्ट फीस लगभग रु। प्रत्येक प्रतिवादी के लिए कोर्ट फीस लगभग रु.50 हैं। हालाँकि, यदि आप एक वकील को नियुक्त करते हैं, (जो कि एक वकील की सलाह है कि तथ्यों को इकट्ठा करने और बहस करने और उन्हें अदालत में पेश करने के बाद याचिकाएं बनाने में ज्ञान और अनुभव है), तो आपकी लागत आपके द्वारा नियुक्त वकील पर निर्भर करेगी।

जनहित याचिका मे होने वाला खर्चा व खर्चा का विवरण
वकील की फीस (Advocate's Fee)
यह सबसे बड़ा खर्च हो सकता है। वकील की फीस उनकी विशेषज्ञता और मामले की जटिलता पर निर्भर करती है। यह फीस प्रति सुनवाई (per hearing) या पूरे मामले के लिए (lump-sum) तय की जा सकती है।

दस्तावेजीकरण और छपाई (Documentation & Printing)
याचिका और उसके सहायक दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी, छपाई, और टाइपिंग का खर्च ।

शपथ पत्र/नोटरी (Affidavit/Notary)
याचिका के साथ लगने वाले शपथ पत्र को नोटरी या ओथ कमिश्नर से प्रमाणित करवाने का खर्च।

डाक और संचार (Postage & Communication)
प्रतिवादियों को याचिका की प्रतियां भेजने और न्यायालय के साथ संवाद करने का खर्च |

जुर्माना/लागत (Penal Costs/Fine)
सबसे महत्वपूर्ण: यदि हाई कोर्ट यह पाती है कि PIL दुर्भावनापूर्ण (Malafide), व्यक्तिगत स्कोर निपटाने के लिए, या केवल प्रचार के लिए दायर की गई है, तो वह याचिकाकर्ता पर बड़ा जुर्माना (Exemplary Cost) लगा सकती है। यह जुर्माना हजारों से लाखों रुपये तक हो सकता है।

ऐसे मुद्दे / मामले हैं जिनके लिए जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकती है
हां, कई विषय हैं जिनके लिए जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकती है। ये विषय उन मामलों से संबंधित हैं जिनमें व्यक्तियों के निजी हित निहित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशा- निर्देश तय किए हैं, जिसके अनुसार कुछ मामलों को जनहित याचिका के रूप में अनुमति नहीं दी जा सकती है। ये हैं:
  • सेवा मामले;
  • मकान मालिक और किरायेदार मामले
  • पेंशन और ग्रेच्युटी मामले
  • चिकित्सा और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश से संबंधित मामले;
  • उच्च न्यायालय या अन्य अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए याचिकाएँ
  • उच्चतम न्यायालय द्वारा उक्त दिशा-निर्देशों में उल्लिखित मदों में से संबंधित 1-10 को छोड़कर, केंद्र और राज्य सरकार के विभागों और स्थानीय निकायों के खिलाफ शिकायतें।

याचिका के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न करना आवश्यक है:
1. शपथ पत्र (Affidavit) - याचिका में दिए गए तथ्यों की सत्यता प्रमाणित करने हेतु ।
2. दुकानों और सड़क की स्थिति दर्शाने वाले फोटोग्राफ।
3. याचिकाकर्ता द्वारा अधिकारियों को दिए गए पूर्व शिकायत पत्र/प्रतिनिधित्व की प्रति।
4. सड़क के संबंध में यदि कोई राजस्व या PWD रिकॉर्ड उपलब्ध हो तो उसकी प्रति।
5. अन्य कानूनी दस्तावेज (वकालतनामा, आदि)।

Written By :- Adv. KR Choudhary

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